Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.18.31: इस प्रकार कहा गया है कि शरणागत की रक्षा न करने में महान् दोष है। शरणागत का त्याग करने से स्वर्ग और यश की प्राप्ति नष्ट हो जाती है तथा मनुष्य का बल और पराक्रम नष्ट हो जाता है॥31॥ | ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं दोषो महानत्र प्रपन्नानामरक्षणे।
अस्वर्ग्यं चायशस्यं च बलवीर्यविनाशनम्॥ ३१॥
अनुवाद
इस प्रकार कहा गया है कि शरणागत की रक्षा न करने में महान् दोष है। शरणागत का त्याग करने से स्वर्ग और यश की प्राप्ति नष्ट हो जाती है तथा मनुष्य का बल और पराक्रम नष्ट हो जाता है॥31॥
‘In this way, it has been stated that there is a great fault in not protecting one who has sought refuge. Abandoning one who has sought refuge destroys the attainment of heaven and good fame and destroys the strength and valour of a man.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥