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ramayan 6.18.27: परंतप! यदि शत्रु भी शरण में आए और हाथ जोड़कर नम्रतापूर्वक दया की याचना करे, तो भी उस पर आक्रमण नहीं करना चाहिए ॥27॥   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.18.27 
बद्धाञ्जलिपुटं दीनं याचन्तं शरणागतम्।
न हन्यादानृशंस्यार्थमपि शत्रुं परंतप॥ २७॥
 
 
अनुवाद
परंतप! यदि शत्रु भी शरण में आए और हाथ जोड़कर नम्रतापूर्वक दया की याचना करे, तो भी उस पर आक्रमण नहीं करना चाहिए ॥27॥
 
Parantap! Even if the enemy comes for shelter and with folded hands humbly pleads for mercy, then he should not be attacked. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)