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ramayan 6.18.22: वानरराज! विभीषण चाहे दुष्ट हो या महात्मा, क्या यह रात्रि-राक्षस मुझे किसी भी प्रकार से, चाहे वह किंचित मात्र भी हानि पहुँचा सकता है?॥22॥   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.18.22 
स दुष्टो वाप्यदुष्टो वा किमेष रजनीचर:।
सूक्ष्ममप्यहितं कर्तुं मम शक्त: कथंचन॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वानरराज! विभीषण चाहे दुष्ट हो या महात्मा, क्या यह रात्रि-राक्षस मुझे किसी भी प्रकार से, चाहे वह किंचित मात्र भी हानि पहुँचा सकता है?॥22॥
 
Monkey King! Whether Vibhishan is a wicked person or a saint, can this night-demon harm me in any way, even in the tiniest way?॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)