Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.17.68: हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ रघुनाथ! इस प्रकार मैंने अपनी क्षमता के अनुसार इस राक्षस की सरलता और निष्कपटता का वर्णन किया है। इसे सुनकर जैसा उचित समझो वैसा करो॥ 68॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  6.17.68 
यथाशक्ति मयोक्तं तु राक्षसस्यार्जवं प्रति।
प्रमाणं त्वं हि शेषस्य श्रुत्वा बुद्धिमतां वर॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ रघुनाथ! इस प्रकार मैंने अपनी क्षमता के अनुसार इस राक्षस की सरलता और निष्कपटता का वर्णन किया है। इसे सुनकर जैसा उचित समझो वैसा करो॥ 68॥
 
Raghunaatha, the best amongst the wise! Thus, I have explained to the best of my abilities about the simplicity and innocence of this demon. After listening to this, do as you deem fit.'॥ 68॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे सप्तदश: सर्ग: ॥ १ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें सत्रहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ७॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)