Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.17.63: दुष्ट व्यक्ति कभी भी निःसंदेह और स्वस्थ मन से आगे नहीं आ सकता। इसके अतिरिक्त उसकी वाणी भी दोषरहित होती है। इसलिए मुझे उस पर कोई संदेह नहीं है। | ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अशङ्कितमति: स्वस्थो न शठ: परिसर्पति।
न चास्य दुष्टवागस्ति तस्मान्मे नास्ति संशय:॥ ६३॥
अनुवाद
दुष्ट व्यक्ति कभी भी निःसंदेह और स्वस्थ मन से आगे नहीं आ सकता। इसके अतिरिक्त उसकी वाणी भी दोषरहित होती है। इसलिए मुझे उस पर कोई संदेह नहीं है।
‘A wicked man can never come forward without any doubt and with a healthy mind. Apart from this, his speech is also flawless. Therefore, I have no doubt about him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥