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श्लोक  6.17.62 
न त्वस्य ब्रुवतो जातु लक्ष्यते दुष्टभावता।
प्रसन्नं वदनं चापि तस्मान्मे नास्ति संशय:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
उसकी बातचीत में कभी कोई बुरी नीयत नहीं दिखती। उसका चेहरा भी खुशनुमा रहता है। इसलिए मुझे उस पर कोई शक नहीं है। 62.
 
His conversation never shows any ill intentions. His face is also cheerful. That is why I have no doubts about him. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)