Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.17.57-58: उनके यहाँ आने के लिए यही उत्तम स्थान और समय है, यह मैं तुम्हें जिस प्रकार सिद्ध हुआ है, बता रहा हूँ। विभीषण नीच पुरुष से महात्मा बने हैं। उन्होंने दोनों के दोष और गुण भी विवेचित किए हैं। तत्पश्चात् रावण में दुष्टता और आपमें वीरता देखकर वे रावण को छोड़कर आपके पास आए हैं। अतः उनका यहाँ आना सर्वथा उचित और उनकी सद्बुद्धि के अनुकूल है ॥57-58॥ | ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एष देशश्च कालश्च भवतीह यथा तथा।
पुरुषात् पुरुषं प्राप्य तथा दोषगुणावपि॥ ५७॥
दौरात्म्यं रावणे दृष्ट्वा विक्रमं च तथा त्वयि।
युक्तमागमनं ह्यत्र सदृशं तस्य बुद्धित:॥ ५८॥
अनुवाद
उनके यहाँ आने के लिए यही उत्तम स्थान और समय है, यह मैं तुम्हें जिस प्रकार सिद्ध हुआ है, बता रहा हूँ। विभीषण नीच पुरुष से महात्मा बने हैं। उन्होंने दोनों के दोष और गुण भी विवेचित किए हैं। तत्पश्चात् रावण में दुष्टता और आपमें वीरता देखकर वे रावण को छोड़कर आपके पास आए हैं। अतः उनका यहाँ आना सर्वथा उचित और उनकी सद्बुद्धि के अनुकूल है ॥57-58॥
This is the best place and time for him to come here, I am telling you the way it is proved. Vibhishan has come from a mean person to a great person. He has also discussed the faults and virtues of both. After that, seeing the evil in Ravana and the valor in you, he has left Ravana and come to you. Therefore, his coming here is absolutely appropriate and in accordance with his good intellect. ॥ 57-58॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥