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ramayan 6.17.56: इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि इस समय विभीषण का यहाँ आना देश और काल के अनुकूल नहीं है। इस विषय में भी मैं अपनी बुद्धि के अनुसार कुछ कहना चाहता हूँ। कृपया सुनिए॥ 56॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.17.56 
अदेशकाले सम्प्राप्त इत्ययं यद् विभीषण:।
विवक्षा तत्र मेऽस्तीयं तां निबोध यथामति॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि इस समय विभीषण का यहाँ आना देश और काल के अनुकूल नहीं है। इस विषय में भी मैं अपनी बुद्धि के अनुसार कुछ कहना चाहता हूँ। कृपया सुनिए॥ 56॥
 
‘Apart from this, it has been said that Vibhishan's coming here at this time is not in accordance with the time and place. Regarding this also, I want to say something according to my wisdom. Please listen.॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)