Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.17.52: महाराज श्री राम! मैं जो कुछ कहूँगा, वह वाद-विवाद, प्रतिस्पर्धा, अपने से अधिक बुद्धिमान होने के अभिमान या किसी प्रकार की इच्छा से नहीं कहूँगा। मैं केवल वही कहूँगा जो कार्य की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए मुझे सत्य प्रतीत होगा॥ 52॥ | ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न वादान्नापि संघर्षान्नाधिक्यान्न च कामत:।
वक्ष्यामि वचनं राजन् यथार्थं राम गौरवात्॥ ५२॥
अनुवाद
महाराज श्री राम! मैं जो कुछ कहूँगा, वह वाद-विवाद, प्रतिस्पर्धा, अपने से अधिक बुद्धिमान होने के अभिमान या किसी प्रकार की इच्छा से नहीं कहूँगा। मैं केवल वही कहूँगा जो कार्य की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए मुझे सत्य प्रतीत होगा॥ 52॥
‘Maharaj Shri Ram! Whatever I will say, I will not say it out of debate or argument, competition, pride of being more intelligent or any kind of desire. I will say only what I understand to be true keeping in mind the gravity of the task.॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥