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ramayan 6.17.47: तत्पश्चात् नीति-अनीति के विशेषज्ञ तथा वाक्पटुता से परिपूर्ण मुझ ने सोच-विचारकर यह बुद्धिमतापूर्ण और उत्तम बात कही-॥47॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.17.47 
ततो मैन्दस्तु सम्प्रेक्ष्य नयापनयकोविद:।
वाक्यं वचनसम्पन्नो बभाषे हेतुमत्तरम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् नीति-अनीति के विशेषज्ञ तथा वाक्पटुता से परिपूर्ण मुझ ने सोच-विचारकर यह बुद्धिमतापूर्ण और उत्तम बात कही-॥47॥
 
After that, I, the expert of morality and immorality and full of eloquence, after thinking and thinking, said this wise and excellent thing -॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)