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ramayan 6.17.45: तत्पश्चात् परम बुद्धिमान जाम्बवान् ने शास्त्रीय ज्ञान का विचार करके उत्तम गुणों से युक्त तथा दोषरहित ये वचन कहे -   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.17.45 
जाम्बवांस्त्वथ सम्प्रेक्ष्य शास्त्रबुद्धॺा विचक्षण:।
वाक्यं विज्ञापयामास गुणवद् दोषवर्जितम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् परम बुद्धिमान जाम्बवान् ने शास्त्रीय ज्ञान का विचार करके उत्तम गुणों से युक्त तथा दोषरहित ये वचन कहे -
 
After this, the most intelligent Jambavan, after pondering over the classical wisdom, said these words full of good qualities and without faults -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)