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ramayan 6.17.44: ‘किसी कुशाग्र बुद्धिवाले गुप्तचर को भेजकर उसे उचित रीति से जांचना चाहिए। तत्पश्चात् उसे उचित रीति से एकत्र करना चाहिए।’॥44॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.17.44 
प्रणिधाय हि चारेण यथावत् सूक्ष्मबुद्धिना।
परीक्ष्य च तत: कार्यो यथान्यायं परिग्रह:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
‘किसी कुशाग्र बुद्धिवाले गुप्तचर को भेजकर उसे उचित रीति से जांचना चाहिए। तत्पश्चात् उसे उचित रीति से एकत्र करना चाहिए।’॥44॥
 
‘A spy with keen intelligence should be sent and he should examine it in the proper manner. After this, it should be collected in the proper manner.'॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)