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ramayan 6.17.40: बहुत से दुर्भावयुक्त मनुष्य अपने विचारों को छिपाकर रखते हैं और अवसर मिलते ही आक्रमण कर देते हैं। इससे महान अनर्थ हो जाता है॥40॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.17.40 
छादयित्वाऽऽत्मभावं हि चरन्ति शठबुद्धय:।
प्रहरन्ति च रन्ध्रेषु सोऽनर्थ: सुमहान् भवेत्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
बहुत से दुर्भावयुक्त मनुष्य अपने विचारों को छिपाकर रखते हैं और अवसर मिलते ही आक्रमण कर देते हैं। इससे महान अनर्थ हो जाता है॥40॥
 
‘Many people with malicious thoughts keep their thoughts hidden and attack as soon as they get a chance. This causes a great disaster.॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)