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ramayan 6.17.38: जब वानरों ने ऐसा कहा, तब बुद्धिमान वानर अंगद ने विभीषण की परीक्षा करने के लिए सुझाव देते हुए सबसे पहले श्री रघुनाथजी से कहा-॥38॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.17.38 
इत्युक्ते राघवायाथ मतिमानङ्गदोऽग्रत:।
विभीषणपरीक्षार्थमुवाच वचनं हरि:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जब वानरों ने ऐसा कहा, तब बुद्धिमान वानर अंगद ने विभीषण की परीक्षा करने के लिए सुझाव देते हुए सबसे पहले श्री रघुनाथजी से कहा-॥38॥
 
When the monkeys said this, the intelligent monkey Angad first spoke to Sri Raghunatha while giving suggestions for testing Vibhishan -॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)