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ramayan 6.17.36: आप सत्यनिष्ठ, वीर योद्धा, धर्मनिष्ठ, बलवान और पराक्रमी, विचारपूर्वक कार्य करने वाले, तीव्र स्मरणशक्ति वाले तथा अपने मित्रों पर विश्वास करने वाले तथा उनके अधीन रहने वाले हैं॥ 36॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.17.36 
त्वं हि सत्यव्रत: शूरो धार्मिको दृढविक्रम:।
परीक्ष्यकारी स्मृतिमान् निसृष्टात्मा सुहृत्सु च॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
आप सत्यनिष्ठ, वीर योद्धा, धर्मनिष्ठ, बलवान और पराक्रमी, विचारपूर्वक कार्य करने वाले, तीव्र स्मरणशक्ति वाले तथा अपने मित्रों पर विश्वास करने वाले तथा उनके अधीन रहने वाले हैं॥ 36॥
 
‘You are a man of truth, a valiant warrior, a man of religious principles, strong and valiant, one who works after due consideration, endowed with a strong memory and one who trusts his friends and surrenders himself in their hands.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)