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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.17.3 
ते चाप्यनुचरास्तस्य चत्वारो भीमविक्रमा:।
तेऽपि वर्मायुधोपेता भूषणोत्तमभूषिता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उसके साथ जो चार सेवक थे, वे भी बड़े वीर और पराक्रमी थे। वे भी कवच ​​और अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए थे और सभी उत्तम आभूषणों से सुसज्जित थे।
 
The four attendants who were with him were also very brave and valorous. They too were wearing armour and were carrying weapons and all of them were adorned with fine ornaments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)