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ramayan 6.17.22: ‘सम्भव है कि यह व्यक्ति राक्षसराज रावण का गुप्तचर हो। यदि ऐसा है, तो इसमें कोई सन्देह नहीं कि वह हम लोगों में प्रवेश करके फूट डालेगा।॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.17.22 
प्रणिधी राक्षसेन्द्रस्य रावणस्य भवेदयम्।
अनुप्रविश्य सोऽस्मासु भेदं कुर्यान्न संशय:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘सम्भव है कि यह व्यक्ति राक्षसराज रावण का गुप्तचर हो। यदि ऐसा है, तो इसमें कोई सन्देह नहीं कि वह हम लोगों में प्रवेश करके फूट डालेगा।॥ 22॥
 
‘It is possible that this person is a spy of the demon king Ravana. If that is the case, then there is no doubt that he will enter among us and create divisions.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)