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ramayan 6.17.11: महाज्ञानी विभीषण आकाश में रहकर सुग्रीव और उन वानरों की ओर देखते हुए ऊँचे स्वर में बोले-॥11॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.17.11 
स उवाच महाप्राज्ञ: स्वरेण महता महान्।
सुग्रीवं तांश्च सम्प्रेक्ष्य खस्थ एव विभीषण:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महाज्ञानी विभीषण आकाश में रहकर सुग्रीव और उन वानरों की ओर देखते हुए ऊँचे स्वर में बोले-॥11॥
 
Vibhishana, the great wise man, while remaining in the sky and looking towards Sugriva and those monkeys, said in a loud voice -॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)