सुलभा: पुरुषा राजन् सततं प्रियवादिन:।
अप्रियस्य च पथ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभ:॥ २१॥
अनुवाद
राजा! ऐसे लोग तो आसानी से मिल जाते हैं जो सदैव मधुर और प्रिय वचन बोलते हैं; परन्तु ऐसे लोग दुर्लभ हैं जो सुनने में अप्रिय परन्तु फल देने वाले वचन बोलते और सुनते हैं।॥ 21॥
‘King! One can easily find people who always speak sweet words that are pleasing to one; but it is rare to find people who speak and listen to words that are unpleasant to hear but beneficial in result.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥