वसेत् सह सपत्नेन क्रुद्धेनाशीविषेण च।
न तु मित्रप्रवादेन संवसेच्छत्रुसेविना॥ २॥
अनुवाद
भाई! यदि तुम्हें शत्रु या क्रोधित विषधर सर्प के साथ रहना पड़े, तो रहने दो; परन्तु जो अपने को मित्र कहता है, परन्तु शत्रु की सेवा करता है, उसके साथ कभी मत रहो॥ 2॥
Brother! If you have to live with an enemy or an enraged poisonous snake then so be it; but never live with a person who calls himself a friend but is serving his enemy.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥