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ramayan 6.15.13: ‘युद्ध के मुहाने पर शत्रुओं पर भगवान् श्री रामजी द्वारा छोड़े गए वे तेजस्वी बाण ब्रह्मदण्ड के समान चमकते हैं, मृत्यु के समान दिखाई देते हैं और यमदण्ड के समान भयंकर हैं। भला उन्हें कौन सहन कर सकता है?॥13॥   |   ramayan सर्ग 6.15: इन्द्रजित द्वारा विभीषण का उपहास तथा विभीषण का उसे फटकारकर सभा में अपनी उचित सम्मति देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 15: इन्द्रजित द्वारा विभीषण का उपहास तथा विभीषण का उसे फटकारकर सभा में अपनी उचित सम्मति देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.15.13 
को ब्रह्मदण्डप्रतिमप्रकाशा-
नर्चिष्मत: कालनिकाशरूपान्।
सहेत बाणान् यमदण्डकल्पान्
समक्षमुक्तान् युधि राघवेण॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘युद्ध के मुहाने पर शत्रुओं पर भगवान् श्री रामजी द्वारा छोड़े गए वे तेजस्वी बाण ब्रह्मदण्ड के समान चमकते हैं, मृत्यु के समान दिखाई देते हैं और यमदण्ड के समान भयंकर हैं। भला उन्हें कौन सहन कर सकता है?॥13॥
 
‘The brilliant arrows shot by Lord Shri Ram at the enemy at the mouth of the battle shine like the Brahmadanda, appear like death and are as dreadful as the Yamadanda. Well, who can bear them?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)