Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.15.12: इन्द्रजित! तुम मूर्ख हो। तुम्हारी बुद्धि परिपक्व नहीं है। विनम्रता तुम्हें छू तक नहीं पाई। तुम्हारा स्वभाव बड़ा तीक्ष्ण है और बुद्धि बहुत अल्प है। तुम अत्यंत मूर्ख, दुष्ट और मूर्ख हो। इसीलिए तुम बालकों के समान बकवास करते हो॥ 12॥ | ramayan सर्ग 6.15: इन्द्रजित द्वारा विभीषण का उपहास तथा विभीषण का उसे फटकारकर सभा में अपनी उचित सम्मति देना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्रजित! तुम मूर्ख हो। तुम्हारी बुद्धि परिपक्व नहीं है। विनम्रता तुम्हें छू तक नहीं पाई। तुम्हारा स्वभाव बड़ा तीक्ष्ण है और बुद्धि बहुत अल्प है। तुम अत्यंत मूर्ख, दुष्ट और मूर्ख हो। इसीलिए तुम बालकों के समान बकवास करते हो॥ 12॥
‘Indrajit! You are foolish. Your intellect is not mature. Humility has not touched you. Your nature is very sharp and your intelligence is very less. You are extremely foolish, wicked and stupid. That is why you talk nonsense like a child.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥