Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.15.11: 'तुम्हारी बुद्धि बहुत ही खोटी है। तुम स्वयं तो वध के योग्य हो ही, जिसने तुम्हें यहाँ बुलाया है, वह भी वध के योग्य है। जिसने आज तुम जैसे साहसी बालक को इन सलाहकारों के पास आने दिया, वह मृत्युदंड का अपराधी है।' 11. | ramayan सर्ग 6.15: इन्द्रजित द्वारा विभीषण का उपहास तथा विभीषण का उसे फटकारकर सभा में अपनी उचित सम्मति देना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वमेव वध्यश्च सुदुर्मतिश्च
स चापि वध्यो य इहानयत् त्वाम्।
बालं दृढं साहसिकं च योऽद्य
प्रावेशयन्मन्त्रकृतां समीपम्॥ ११॥
अनुवाद
'तुम्हारी बुद्धि बहुत ही खोटी है। तुम स्वयं तो वध के योग्य हो ही, जिसने तुम्हें यहाँ बुलाया है, वह भी वध के योग्य है। जिसने आज तुम जैसे साहसी बालक को इन सलाहकारों के पास आने दिया, वह मृत्युदंड का अपराधी है।' 11.
‘Your wisdom is very flawed. You yourself deserve to be killed, and the one who has called you here also deserves to be killed. The one who has allowed a very daring boy like you to come near these advisors today is guilty of capital punishment. 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥