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ramayan 6.15.1: विभीषण बृहस्पति के समान बुद्धिमान थे। उनके वचनों को बड़ी पीड़ा के साथ सुनकर दानवों में प्रधान इन्द्रजित ने वहाँ यह कहा - 1॥   |   ramayan सर्ग 6.15: इन्द्रजित द्वारा विभीषण का उपहास तथा विभीषण का उसे फटकारकर सभा में अपनी उचित सम्मति देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.15.1 
बृहस्पतेस्तुल्यमतेर्वचस्त-
न्निशम्य यत्नेन विभीषणस्य।
ततो महात्मा वचनं बभाषे
तत्रेन्द्रजिन्नैर्ऋतयूथमुख्य:॥ १॥
 
 
अनुवाद
विभीषण बृहस्पति के समान बुद्धिमान थे। उनके वचनों को बड़ी पीड़ा के साथ सुनकर दानवों में प्रधान इन्द्रजित ने वहाँ यह कहा - 1॥
 
Vibhishana was as intelligent as Jupiter. After listening to his words with great pain, the great Indrajit, the chief among the demon-combatants, said this there - 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)