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न वासवेनापि सहस्रचक्षुषा
युधास्मि शक्यो वरुणेन वा पुन:।
मया त्वियं बाहुबलेन निर्जिता
पुरा पुरी वैश्रवणेन पालिता॥ २१॥
अनुवाद
सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र और वरुण भी युद्ध में मेरा सामना नहीं कर सकते। पूर्वकाल में मैंने अपने बल से ही कुबेर द्वारा पोषित इस लंकापुरी को जीत लिया था।
Even the thousand-eyed Indra and Varuna cannot face me in battle. In the past, I had conquered this Lankapuri, nurtured by Kubera, by my own strength.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे त्रयोदश: सर्ग: ॥ १ ३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें तेरहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥