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श्लोक  6.13.2 
य: खल्वपि वनं प्राप्य मृगव्यालनिषेवितम्।
न पिबेन्मधु सम्प्राप्य स नरो बालिशो भवेत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति जंगली जानवरों और साँपों से भरे हुए सुदूर जंगल में जाता है और वहाँ पीने योग्य शहद पाता है, परन्तु उसे पीता नहीं, वह मूर्ख है।
 
He who goes to a remote forest infested with wild animals and serpents and finds potable honey there but does not drink it is a fool.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)