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ramayan 6.13.17: 'अन्यथा, पर्वत की गुफा में सुखपूर्वक सोए हुए सिंह के समान और क्रोध में बैठे हुए मृत्यु के समान भयंकर मुझ रावण को कौन जगाना चाहेगा?॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.13.17 
को हि सिंहमिवासीनं सुप्तं गिरिगुहाशये।
क्रुद्धं मृत्युमिवासीनं प्रबोधयितुमिच्छति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'अन्यथा, पर्वत की गुफा में सुखपूर्वक सोए हुए सिंह के समान और क्रोध में बैठे हुए मृत्यु के समान भयंकर मुझ रावण को कौन जगाना चाहेगा?॥17॥
 
‘Otherwise who would want to wake me, Ravana, who is like a lion sleeping comfortably in a mountain cave and who is as fearsome as death sitting in anger?॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)