श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  6.128.99 
निर्दस्युरभवल्लोको नानर्थं कश्चिदस्पृशत्।
न च स्म वृद्धा बालानां प्रेतकार्याणि कुर्वते॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत् में कहीं भी चोर-डाकुओं का नाम नहीं सुनाई देता था। कोई भी मनुष्य बुरे कर्मों में लिप्त नहीं होता था और वृद्धों को बालकों का अंतिम संस्कार नहीं करना पड़ता था॥ 99॥
 
The name of thieves or robbers was not heard anywhere in the entire world. No man used to indulge in evil deeds and the old people did not have to perform the last rites of children.॥ 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)