श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  6.128.94 
पौण्डरीकाश्वमेधाभ्यां वाजपेयेन चासकृत्।
अन्यैश्च विविधैर्यज्ञैरयजत् पार्थिवात्मज:॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार महाराजा श्री राम ने अनेक बार पौण्डरीक, अश्वमेध, वाजपेय तथा अन्य अनेक प्रकार के यज्ञ किये।
 
Prince Maharaja Shri Ram performed the Paundarik, Ashwamedha, Vajpayee and various other types of yajnas many a times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)