श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  6.128.92 
आतिष्ठ धर्मज्ञ मया सहेमां
गां पूर्वराजाध्युषितां बलेन।
तुल्यं मया त्वं पितृभिर्धृता या
तां यौवराज्ये धुरमुद्वहस्व॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा लक्ष्मण! तुम मेरे साथ इस पृथ्वी के उस राज्य पर प्रतिष्ठित हो जाओ, जिसका पालन चतुरंगिणी सेना सहित पूर्व राजाओं ने किया था। मेरी ही भाँति तुम भी अपने पिता, पितामह तथा परदादा के द्वारा धारण किए गए राज्य का भार ग्रहण करो।' 92॥
 
Religious Lakshman! May you be established with me on the kingdom of this earth which was followed by the previous kings with the Chaturangini army. Like me, you too should assume the responsibility of the kingdom which was held by your father, grandfather and great-grandfather.' 92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)