श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  6.128.91 
स राज्यमखिलं शासन्निहतारिर्महायशा:।
राघव: परमोदार: शशास परया मुदा।
उवाच लक्ष्मणं रामो धर्मज्ञं धर्मवत्सल:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का संहार करके परम दानी महाशस्वी श्री रघुनाथजी बड़े आनन्द से सम्पूर्ण राज्य का शासन करने लगे। उन धर्मनिष्ठ श्रीराम ने धर्मात्मा लक्ष्मण से कहा -
 
After killing his enemies, the most generous Mahashasvi Shri Raghunathji started ruling the entire kingdom with great joy. That religious devotee Shri Ram said to the religious person Lakshmana –
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)