श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.128.9 
जगदद्याभिषिक्तं त्वामनुपश्यतु राघव।
प्रतपन्तमिवादित्यं मध्याह्ने दीप्ततेजसम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! अब हमारी यही कामना है कि संसार के सभी लोग आपका राज्याभिषेक देखें। आपका तेज और वैभव मध्याह्न के सूर्य के समान बढ़ता रहे।॥9॥
 
‘Raghunandan! Now our only wish is that all the people of the world should see your coronation. May your glory and majesty keep increasing like the midday sun.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)