श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 81-82
 
 
श्लोक  6.128.81-82 
अथ सा वायुपुत्राय तं हारमसितेक्षणा॥ ८१॥
तेजो धृतिर्यशो दाक्ष्यं सामर्थ्यं विनयो नय:।
पौरुषं विक्रमो बुद्धिर्यस्मिन् नेतानि नित्यदा॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
तब माता सीता ने श्याम नेत्रों वाले वायुपुत्र हनुमान् को परास्त कर दिया, जिनमें तेज, चपलता, यश, चतुरता, बल, शील, नीति, पुरुषार्थ, पराक्रम और उत्तम बुद्धि - ये गुण सदैव विद्यमान रहते हैं ॥81-82॥
 
Then Mother Sita, with the dark eyes, gave defeat to Hanuman, the son of Vayu, in whom sharpness, agility, fame, cleverness, power, modesty, policy, effort, bravery and excellent intelligence - these virtues are always present. 81-82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)