श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 72-73h
 
 
श्लोक  6.128.72-73h 
भूमि: सस्यवती चैव फलवन्तश्च पादपा:॥ ७२॥
गन्धवन्ति च पुष्पाणि बभूवू राघवोत्सवे।
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के राज्याभिषेक के समय पृथ्वी फसलों से हरी-भरी हो गई, वृक्षों पर फल लग गए और फूलों में सुगंध आ गई।
 
At the time of Sri Raghunath's coronation, the earth became green with crops, trees bore fruits and flowers became fragrant. 72 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)