श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 62-63
 
 
श्लोक  6.128.62-63 
ऋत्विग्भिर्ब्राह्मणै: पूर्वं कन्याभिर्मन्त्रिभिस्तथा।
योधैश्चैवाभ्यषिञ्चस्ते सम्प्रहृष्टै: सनैगमै:॥ ६२॥
सर्वौषधिरसैश्चापि दैवतैर्नभसि स्थितै:।
चतुर्भिर्लोकपालैश्च सर्वैर्देवैश्च संगतै:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
(किसने करवाया? यह बताया जाता है -) सर्वप्रथम उन्होंने समस्त औषधियों के रस तथा पूर्वोक्त जल से पुरोहित ब्राह्मणों द्वारा, तत्पश्चात सोलह कन्याओं द्वारा तथा तत्पश्चात मंत्रियों द्वारा अभिषेक करवाया। इसके पश्चात उन्होंने हर्ष से भरे हुए अन्य योद्धाओं तथा श्रेष्ठ व्यापारियों को भी अभिषेक का अवसर दिया। उस समय आकाश में स्थित समस्त देवताओं तथा चारों लोकपालों ने एकत्रित होकर भी भगवान श्री राम का अभिषेक किया। 62-63।
 
(Who got it done? This is told -) First of all he got the abhishek done with the juices of all the medicines and the aforesaid water by the priests Brahmins, then by sixteen girls and then by the ministers. After this he also gave the opportunity of anointing to other warriors and the best businessmen filled with joy. At that time all the gods standing in the sky and the four Lokpalas gathered together also anointed Lord Shri Ram. 62-63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)