श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 60-61
 
 
श्लोक  6.128.60-61 
वसिष्ठो वामदेवश्च जाबालिरथ काश्यप:।
कात्यायन: सुयज्ञश्च गौतमो विजयस्तथा॥ ६०॥
अभ्यषिञ्चन्नरव्याघ्रं प्रसन्नेन सुगन्धिना।
सलिलेन सहस्राक्षं वसवो वासवं यथा॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जिस प्रकार आठ वसुओं ने भगवान् इन्द्र का अभिषेक किया था, उसी प्रकार वसिष्ठ, वामदेव, जाबालि, कश्यप, कात्यायन, सुयज्ञ, गौतम और विजय, इन आठ मंत्रियों ने सीतासहित महापुरुष श्री रामचन्द्रजी का स्वच्छ और सुगन्धित जल से अभिषेक किया॥60-61॥
 
After that, just as the eight Vasus had anointed Lord Indra, in the same way Vasishtha, Vamdev, Jabali, Kashyap, Katyayan, Suyajna, Gautam and Vijay, these eight ministers anointed the great man Shri Ramchandraji along with Sita with clean and fragrant water. 60-61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)