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ramayan 6.128.59: तत्पश्चात् शुद्धचित्त वृद्ध वसिष्ठजी ने ब्राह्मणों के साथ सीता सहित श्री रामचन्द्रजी को रत्नमयी मंच पर बैठाया।   |   ramayan सर्ग 6.128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  6.128.59 
तत: स प्रयतो वृद्धो वसिष्ठो ब्राह्मणै: सह।
रामं रत्नमये पीठे ससीतं संन्यवेशयत्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शुद्धचित्त वृद्ध वसिष्ठजी ने ब्राह्मणों के साथ सीता सहित श्री रामचन्द्रजी को रत्नमयी मंच पर बैठाया।
 
Thereafter, the pure conscious old Vasisthaji along with the Brahmins made Shri Ramchandraji along with Sita sit on the Ratnamayi platform.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)