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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य
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श्लोक 51
श्लोक
6.128.51
एवमुक्ता महात्मानो वानरा वारणोपमा:।
उत्पेतुर्गगनं शीघ्रं गरुडा इव शीघ्रगा:॥ ५१॥
अनुवाद
सुग्रीव की आज्ञा पाते ही हाथी के समान विशाल और गरुड़ के समान वेगवान महाहृदयी वानर तुरंत आकाश में उड़ गए ॥51॥
Upon Sugreeva's orders, the great-hearted monkeys, as huge as elephants and as swift as Garuda, immediately flew into the sky. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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