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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य
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श्लोक 48
श्लोक
6.128.48
उवाच च महातेजा: सुग्रीवं राघवानुज:।
अभिषेकाय रामस्य दूतानाज्ञापय प्रभो॥ ४८॥
अनुवाद
तत्पश्चात् तेजस्वी भरत ने सुग्रीव से कहा - 'प्रभु! आप अपने दूतों को प्रभु श्री राम के अभिषेक के लिए जल लाने की आज्ञा दीजिए॥48॥
After that, the brilliant Bharata said to Sugriva – 'Lord! Please order your messengers to bring water for the consecration of Lord Shri Ram. 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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