स पुरोगामिभिस्तूर्यैस्तालस्वस्तिकपाणिभि:।
प्रव्याहरद्भिर्मुदितैर्मङ्गलानि वृतो ययौ॥ ३७॥
अनुवाद
आगे-आगे बाजेवाले चल रहे थे। वे हर्षपूर्वक तुरही, झाँझ और स्वस्तिक बजाते और मंगलगीत गाते चल रहे थे। उनके साथ श्री रामचंद्रजी नगर की ओर चल पड़े।
At the front were the musicians. They were joyfully playing trumpets, cymbals and swastikas and singing auspicious songs. Along with them, Shri Ramchandraji started moving towards the city.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥