श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.128.35 
ते वर्धयित्वा काकुत्स्थं रामेण प्रतिनन्दिता:।
अनुजग्मुर्महात्मानं भ्रातृभि: परिवारितम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उन सबने आगे बढ़कर श्री रघुनाथजी को बधाई दी और श्री रामजी ने भी उन्हें बधाई दी। तब नगर के सब निवासी अपने भाइयों से घिरे हुए महाबली श्री रामजी के पीछे-पीछे चल पड़े॥35॥
 
All of them came forward and congratulated Shri Raghunathji and Shri Ram also congratulated them in return. Then all the citizens of the city surrounded by their brothers started following the great Shri Ram.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)