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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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श्लोक 31
श्लोक
6.128.31
तत: शत्रुञ्जयं नाम कुञ्जरं पर्वतोपमम्।
आरुरोह महातेजा: सुग्रीव: प्लवगर्षभ:॥ ३१॥
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली वानरराज सुग्रीव शत्रुंजय नामक पर्वताकार हाथी पर सवार हुए॥31॥
Thereafter, the mighty monkey king Sugriva mounted on the mountain-shaped elephant named Shatrunjay. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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