श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.128.24 
अशोको विजयश्चैव सिद्धार्थश्च समाहिता:।
मन्त्रयन् रामवृद्धॺर्थमृद्धॺर्थं नगरस्य च॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अशोक, विजय और सिद्धार्थ- ये तीनों मंत्री एकाग्रचित्त होकर श्री रामचन्द्रजी के उत्थान और नगर की समृद्धि के लिए परस्पर परामर्श करने लगे॥24॥
 
Ashoka, Vijay and Siddharth - these three ministers became focused and started consulting each other for the rise of Shri Ramchandraji and the prosperity of the city. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)