Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.128.21: सुग्रीव और हनुमान जी दोनों ही इन्द्र के समान तेजस्वी थे। दोनों के कानों में सुन्दर कुण्डल शोभा पा रहे थे। स्नान करके दोनों दिव्य वस्त्राभूषणों से सुसज्जित होकर नगर की ओर चल पड़े॥21॥   |   ramayan सर्ग 6.128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.128.21 
सुग्रीवो हनुमांश्चैव महेन्द्रसदृशद्युती।
स्नातौ दिव्यनिभैर्वस्त्रैर्जग्मतु: शुभकुण्डलौ॥ २१॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव और हनुमान जी दोनों ही इन्द्र के समान तेजस्वी थे। दोनों के कानों में सुन्दर कुण्डल शोभा पा रहे थे। स्नान करके दोनों दिव्य वस्त्राभूषणों से सुसज्जित होकर नगर की ओर चल पड़े॥21॥
 
Both Sugriva and Hanuman ji were as radiant as Lord Indra. Beautiful earrings were adorning the ears of both of them. After taking bath, both of them got adorned with divine clothes and headed towards the city. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)