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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य
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श्लोक 20
श्लोक
6.128.20
अग्न्यर्कामलसंकाशं दिव्यं दृष्ट्वा रथं स्थितम्।
आरुरोह महाबाहू राम: परपुरंजय:॥ २०॥
अनुवाद
वहाँ अग्नि और सूर्य के समान चमकते हुए उस दिव्य रथ को खड़ा देखकर शत्रु नगर को जीतने वाले महाबाहु श्री राम उस पर सवार हो गए।
Seeing that divine chariot standing there, shining like the fire and the Sun, the mighty-armed Sri Rama, the conqueror of the enemy city, mounted it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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