श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  6.128.123 
भक्त्या रामस्य ये चेमां संहितामृषिणा कृताम्।
ये लिखन्तीह च नरास्तेषां वासस्त्रिविष्टपे॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
जो लोग श्री रामचन्द्रजी के प्रति भक्तिभाव से महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित इस रामायण-संहिता को लिखते हैं, वे स्वर्ग में निवास करते हैं ॥123॥
 
Those who write this Ramayana-Samhita written by Maharishi Valmiki with devotion towards Shri Ramchandraji, reside in heaven. 123॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)