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ramayan 6.128.12: भरत के वचन सुनकर शत्रु नगरी को जीतने वाले भगवान राम ने ‘तथास्तु’ कहकर उन्हें स्वीकार किया और एक सुंदर आसन पर बैठ गए।   |   ramayan सर्ग 6.128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.128.12 
भरतस्य वच: श्रुत्वा राम: परपुरञ्जय:।
तथेति प्रतिजग्राह निषसादासने शुभे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भरत के वचन सुनकर शत्रु नगरी को जीतने वाले भगवान राम ने ‘तथास्तु’ कहकर उन्हें स्वीकार किया और एक सुंदर आसन पर बैठ गए।
 
On hearing Bharat's words, Lord Rama, the conqueror of the enemy city, accepted them by saying 'Tathastu' and sat on a beautiful seat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)