श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  6.128.115 
श्रवणेन सुरा: सर्वे प्रीयन्ते सम्प्रशृण्वताम्।
विनायकाश्च शाम्यन्ति गृहे तिष्ठन्ति यस्य वै॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
इसे सुनकर सभी देवता श्रोताओं पर प्रसन्न हो जाते हैं और जिसके घर में उपद्रवी ग्रह होते हैं, वे सभी ग्रह शांत हो जाते हैं ॥115॥
 
On hearing this all the gods become pleased with the listeners and in the house of the person whose house there are disturbing planets, all those planets become calm. ॥ 115॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)