श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  6.128.105 
आसन् प्रजा धर्मपरा रामे शासति नानृता:।
सर्वे लक्षणसम्पन्ना: सर्वे धर्मपरायणा:॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के राज्यकाल में सभी लोग धर्म परायण थे। वे कभी झूठ नहीं बोलते थे। सभी लोग सद्गुणों से संपन्न थे और सभी ने धर्म का आश्रय लिया था॥105॥
 
During the reign of Shri Ram, all the people were devoted to religion. They never lied. All the people were blessed with good qualities and all had taken refuge in religion.॥ 105॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)