श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  6.128.102 
रामो रामो राम इति प्रजानामभवन् कथा:।
रामभूतं जगदभूद् रामे राज्यं प्रशासति॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के राज्यकाल में लोगों में राम, राम, राम की ही चर्चा थी। सारा जगत श्री राममय हो रहा था। 102॥
 
During the reign of Shri Ram, there was only talk of Ram, Ram, Ram among the people. The whole world was becoming filled with Shri Ram. 102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)